जब कोई व्यक्ति घर खरीदने के लिए बैंक से लोन लेता है, तो सबसे पहला सवाल यही होता है कि हर महीने कितनी किस्त यानी EMI देनी होगी। EMI का मतलब होता है हर महीने बैंक को दी जाने वाली तय रकम, जिसमें लोन का कुछ हिस्सा और उस पर लगने वाला ब्याज शामिल होता है। यहां हम यह समझेंगे कि अगर कोई व्यक्ति 15 लाख रुपये का होम लोन 7 साल के लिए लेता है, तो उसकी EMI लगभग कितनी बनेगी और कुल कितना पैसा बैंक को लौटाना पड़ेगा।
इस लेख में समझाने के लिए हमने यह मान लिया है कि बैंक की ब्याज दर सालाना 9 प्रतिशत है, जो आज के समय में एक सामान्य होम लोन ब्याज दर मानी जाती है। अलग-अलग बैंक में ब्याज दर थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है, जिससे EMI में भी फर्क पड़ सकता है।
7 साल की अवधि में 15 लाख के लोन पर EMI कितनी बनेगी
अगर कोई व्यक्ति 15 लाख रुपये का होम लोन 7 साल यानी 84 महीने के लिए लेता है और ब्याज दर 9 प्रतिशत सालाना रहती है, तो उसकी हर महीने की EMI लगभग 24,200 रुपये के आसपास बनती है। इसका मतलब यह हुआ कि व्यक्ति को पूरे 7 साल तक हर महीने करीब 24 हजार रुपये बैंक को देने होंगे।
यह EMI इसलिए तय होती है ताकि लोन की रकम धीरे-धीरे खत्म हो जाए और साथ ही ब्याज भी उसी में शामिल होकर कटता रहे। शुरुआत के कुछ सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में चला जाता है और बाद के सालों में मूल रकम तेजी से घटने लगती है।
कुल कितना पैसा बैंक को वापस करना होगा
अब यह समझना जरूरी है कि सिर्फ EMI जान लेना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि पूरे 7 साल में कुल कितना पैसा बैंक को देना पड़ेगा। अगर हर महीने लगभग 24,200 रुपये की EMI दी जाती है और यह 84 महीने तक चलती है, तो कुल भुगतान करीब 20.30 लाख रुपये के आसपास हो जाता है।
इसका सीधा मतलब यह है कि 15 लाख के लोन पर लगभग 5.30 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में बैंक को देने पड़ते हैं। यह राशि लोन की अवधि और ब्याज दर पर निर्भर करती है। अगर ब्याज दर कम होती या अवधि ज्यादा होती, तो यह आंकड़ा बदल सकता था।
15 लाख के होम लोन की EMI का आसान गणित
नीचे दी गई टेबल से आप पूरे लोन का आसान हिसाब एक नजर में समझ सकते हैं।
| विवरण | राशि |
|---|---|
| लोन राशि | ₹15,00,000 |
| लोन अवधि | 7 साल (84 महीने) |
| ब्याज दर (अनुमानित) | 9% सालाना |
| मासिक EMI | लगभग ₹24,200 |
| कुल भुगतान | लगभग ₹20,30,000 |
| कुल ब्याज | लगभग ₹5,30,000 |
यह टेबल सिर्फ समझाने के लिए है ताकि एक आम आदमी भी आसानी से पूरे लोन का हिसाब समझ सके।
EMI कम या ज्यादा कैसे हो सकती है
EMI इस बात पर भी निर्भर करती है कि बैंक आपको कितनी ब्याज दर देता है और आपने कितने साल के लिए लोन लिया है। अगर ब्याज दर कम हो जाती है, तो EMI भी कम हो जाती है। इसी तरह अगर लोन की अवधि बढ़ा दी जाए, तो EMI कम दिखेगी लेकिन कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है। इसलिए लोन लेते समय EMI और कुल ब्याज दोनों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी होता है।
होम लोन लेने से पहले क्या सोचकर फैसला लें
होम लोन लेने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी महीने की आमदनी से EMI आराम से निकल सकती है या नहीं। EMI इतनी होनी चाहिए कि बाकी खर्चों में परेशानी न आए। यह भी कोशिश करें कि भविष्य में अगर आमदनी बढ़े, तो कभी-कभी अतिरिक्त भुगतान करके लोन जल्दी खत्म किया जा सके, इससे ब्याज का बोझ कम हो जाता है।
नया डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताई गई EMI और ब्याज दर अनुमान पर आधारित हैं। वास्तविक EMI बैंक, ब्याज दर, लोन शर्तों और आपके प्रोफाइल के अनुसार अलग हो सकती है। लोन लेने से पहले संबंधित बैंक या वित्तीय सलाहकार से सही जानकारी जरूर लें।